आखिर क्या हो गया हम भारतियों को ?

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हमारा भारत देश एक ऐसा देश है जहाँ पर सभी त्योहारों को बड़े ही चाव से सभी लोग मनाते है ।

चाहे इसमें होली दिवाली हो या फिर ईद हो, चाहे क्रिसमस हो या गुरुपर्व हो । कितना आनंद आता है जब हम ये बोलते है की हम इस देश की वाशी है जहाँ पर लोग सभी त्योहारों को बड़ी ख़ुशी के साथ मनाते है। परन्तु आज आपको एक ऐसी बात से अवगत कराएँगे जोकि बड़ी ही शर्मनाक.

आखिर क्या हो गया है इस देश के सब लोगो को ?

आखिर क्यों ये भूल गए है अपनी सभ्यता को ?

क्या हमारी भारतीय संस्कृति सही नहीं है जो ये लोग इसे भूलते जा रहे है ?

क्या आज भारतीयों के लिए भारतीय संस्कृति कुछ मायने नहीं रखती ?

 

आखिर क्या हो गया है इस देश के लोगो को ?

 

जैसे की आपको पता है ब्रिटिश लोगो का नया साल 1 जनवरी को शुरू होता है और सब लोग उसे बड़े  चाव से मनाते है । उसके आने से एक एक महीने पहले नया साल मनाने की  तयारी करने लगते है । उस समय सभी को पता होता है की नया साल आने वाला है।  सभी लोग उस समय पर बहुत ही खुश होता है जोकि होना भी चाहिए  🙂 अच्छी बात है ।

पर क्या उन भारतीयों को ये भी याद रहता है की हिन्दू नव वर्ष कब मनाया जाता है ?  नहीं पता होता लगभग 90 प्रतिशत लोगो को ये नहीं पता होता की हिन्दू नव वर्ष कब आता है और क्यों मनाया जाता है ? ये हम सभी के लिए शर्म की बात है की हम दूसरों के त्योहारों को तो बड़ा  याद रखते  है पर हमारे खुद के त्यौहार हमारे लिए कोई मायने नहीं रखते ।  वो कहते है ना  घर के दूर पडोसी नेड़े  आज सभी भारतियों ने यही कर दिया है ।

अगर आपको पता हो तो हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल प्रतिपदा के प्रथम दिन हिन्दू नव वर्ष मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है की सतयुग का प्रथम दिन भी इसी दिन शुरू हुआ था । एक अन्य मान्यता के अनुसार ब्रम्हा ने इसी दिन सृष्टि का सृजन शुरू किया था ।

हमें इस दिन को भी बड़े ही चाव और ख़ुशी के साथ मनाना चाहिए । पर ऐसा हमारे देश मैं नहीं हो रहा है । वैसे तो सभी कहते फिरते है हम कट्टर हिन्दू है हम कट्टर भारतीय है पर इस दिन कहा चला जाता सभी का कट्टरपन ?

जेसे हम सब एक होने का सन्देश देते फिरते है,

जैसे हम सभी धर्मो के त्योहारों को मनाते है, वेसे ही हमें अपने इस हिन्दू नव वर्ष को भी बड़े ही धूम धाम से मानना चाहिए.

 

अगर हम भारतीय ये नहीं कर सकते तो हमें नाक डुबो कर मर जाना चाहिए कही पर । लानत है ऐसे हिदुत्व पर जो दूसरों को ज्यादा महत्व  देते है और अपने उनके लिए कोई मायने नहीं रखते.

 

मेरा हिन्दू होने के नाते आप से एक छोटा सा अनुरोध है 

मै ये  नहीं कहता की तुम लोग दूसरों के त्यौहार मानना छोड़ दो और ये  दुसरे कोई है ही नहीं.  ये भी अपने ही भाई है, हम सब एक है । पर हमें अपने त्योहारों को तो नहीं भूलना चाहिए. जेसे हम और बाकि सब त्योहारों को मनाते है वैसे ही हमें अपने भी त्योहार को मानना चाहिए.

 

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