आखिर क्यों कहते है कुरूक्षेत्र को ऐतिहासिक नगरी !

Posted on Posted in मेरा हरियाणा

आइये आज हम आपको एक ऐसे स्थान से परिचित कराएँगे जिसके नाम का तो बच्चे -2  को पता है पर ये नहीं पता आखिर क्यों प्रसिद्ध है वो स्थान.

आज हम आपको बताने वाले है कुरुखेत्र के बारे मैं बताएँगे आखिर क्यों कुरुखेत्र इतना ज्यादा प्रसिद्ध है?

 

कैसे  हुआ था कुरुखेत्र का नामकरण?

 

भारत मैं ऐसे बहुत से शहर है जिनके नामकरण के पीछे कोई न कोई राज है ठीक वैसे ही कुरुखेत्र के नामकरण के पीछे एक राज है वो हम आपको बता रहे है महर्षि वेद व्यास जी के द्वारा लिखे गए महान ग्रन्ध महाभारत में बताया गया  है की यहाँ पर कौरवों और पांडवों के पूर्वज कुरु  रहते थे तो उन्होंने यहाँ पर एक विशाल तालाब  का निर्माण करवाया था । राजा कुरु का  क्षेत्र होने के कारण राजा कुरु ने  इस क्षेत्र की बड़े ही मनोयोग से जुटी की थी जिसके  कारण इस शहर का नाम कुरुखेत्र पड़ा ।

 

जैसे कुरुखेत्र के नामकरण के पीछे एक कारण है वैसे ही इसके प्रसिद्ध होने के पीछे भी बहुत से कारण है. आइये हम आपको उनके बारे मैं बताते है ।

 

कुरुक्षेत्र के मुख्य चीजें जिनके कारण ये प्रसिद्ध है

1-ब्रह्मसरोवर

2 – सन्निहित सरोवर

3 – भद्रकाली मन्दिर

4 – ज्योतिसर

5- पिहोवा

6 – श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर

7 – महाभारत का युद्ध

8 – गीता ज्ञान

 

1-ब्रह्मसरोवर – 

ऐसा कहा जाता है की ब्रह्मा जी ने इस तालाब को विशाल  यज्ञ के द्वारा बनाया था ।

इस तालाब के बीच में भगवान शिव का महान मंदिर है और वहां पर जाने के लिए एक पुल बनाया गया है । सूर्य ग्रहण के समय पर इस तालाब पर भव्य मेला का आयोजन होता है । दूर दूर से लोग लोग यहाँ पर स्नान  करने के लिए आते है । और कहते है की यहाँ पर स्नान करने से पितरों को शांति मिलती है । और तो और ये भी कहा जाता है की जितना पुण्य अश्‍वमेघ यज्ञ करने से प्राप्त होता है उतना ही पुण्य ब्रह्मसरोवर में डुबकी लगने से मिलता है । महाभारत काल में इस सरोवर में भगवान श्री कृष्ण जी ने भी स्नान किया था ।

 

2 – सन्निहित सरोवर –  

यह पवित्र तीर्थ कुरुक्षेत्र में कैथल मार्ग पर स्थित श्री कृष्ण संग्रहालय के पास में है । बताया जाता है की इस तीर्थ पर आकर महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने सभी दिवंगतो की मुक्ति के लिए उनके पिंड दान किये थे । कहा जाता है की इसी महान तीर्थ मैं सैट सरस्वती नदी आकर मिलते हैं । इस सरोवर में अमावस्या के दिन स्नान करना बड़ा ही पुण्यकारी मन जाता है ।

 

3 – भद्रकाली मन्दिर

बताया जाता है की जब माता सती ने अपने पति महादेव का अपमान  अपने पिता के घर होते देखा तो उनसे ये सहा नहीं गया और उन्होंने अपने पिताश्री द्वारा करवाए गए यज्ञ में कूदकर अपनी जन दे थी. ऐसा होता देख भगवान शिव उनके शव को लेकर पुरे ब्रह्मांड मैं विचरण करने लगे तो उस समय श्री नारायण जी ने अपने सुदर्शन चक्र के साथ माता सती के शरीर के 52 टुकडे किये थे । बताते है की जहाँ जहाँ पर माता के शरीर के टुकडे गिरे थे वही वही शक्ति पीठ स्थापित हुए थे । उन 52 टुकड़ों में माता सती के घुटने से नीचे का भाग हरयाणा के कुरुक्षेत्र शहर में आकर गिरा था और  यहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई ।

भगवान श्री कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने महाभारत के युद्ध से पहले इसी मंदिर मैं आकर श्रधा पूर्वक माता की आराधना कर विजय होने का वरदान माँगा था और विजयी होने पर माता के मंदिर मैं घोड़े चढाने की मन्नत मांगी थी । महाभारत का युद्ध खत्म होने पर अर्जुन ने मटके मंदिर में आकर घोड़े चढ़ाये थे। और आज भी माता के मंदिर में श्रद्धालु सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढाते है। इस मंदिर के बाहर देवी तालाब है बताते है की इसी तालाब के छोर पर स्थित मदिर में ही भगवान श्री कृष्ण और बलराम जी का मुंडनसंस्कार हुआ था । इस मंदिर मैं अश्विन और चैत्र मास में आने वाले नवरात्रे बड़े ही धूम धाम से मनाये जाते है ।

 

4 – ज्योतिसर 

ज्योतिसर कुरुक्षेत्र में स्थित एक क़स्बा है । बताया जाता है की इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता जी का उपदेश दिया था. और ये भी बताते है की गीता उपदेश देते समय बरगद के पेड़ के नीचे श्री कृष्ण जी ने अपना विक्राट रूप अर्जुन को दिखाया था ।

जिस पेड़ को आप देख रहे है ये वाही पेड़ है । ये पेड़ आज वाही पर है ।

 

5 – पिहोवा 

पिहोवा  का पुराना नाम पृथूदक है जो की एक महा प्रसिद्ध तीर्थ है जो की सरस्वती नदी पर है।  ऐसा मन  जाता है की इसकी रचना प्रजापति ब्रह्मा जी ने सृष्टि के आरम्भ में पृथ्वी, जल आकाश व वायु के साथ ही कि थी । बताया जाता है की महाराजा पृथु ने अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका क्रियाकर्म और श्राद्ध इसी जगह पर किया था । और बताते है की इसी वजह से इस स्थान का नाम पृथूदक पड़ा। ऐसा बताया जाता है की पद्मपुराण में लिखा है की जो भी व्यक्ति सरस्वती नदी के उत्तरी तट पर पृथूदक में जप करता हुआ अपने प्राण त्यागता है उसे अमरता की प्राप्ति होती है ।

 

6 – श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर

श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर बड़ा ही पावन मंदिर है जो की कुरूक्षेत्र में स्थित है । ऐसी मान्यता है की महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन ने श्री कृष्ण सहित आकर इस मंदिर में महादेव शिव जी की पूजा की थी। यह मंदिर एक अलग पहचान रखता है क्योकि ये मंदिर और  गुरुद्वारा दोनों ही एक दीवार से लगते है

 

7 – महाभारत का युद्ध

महाभारत का युद्ध – इस युद्ध के बारे में तो भारत का बच्चा बच्चा जानता है क्योकि ये एक ऐसा युद्ध है जिसने लाखों योद्धाओं  ने भाग लिया था । महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था जिसमे लाखों योद्धा  मारे गए थे। महाभारत की लड़ाई कुरूक्षेत्र में ही लड़ी गयी थी ।  महाभारत के सभी योद्धा इसी भूमि की गोद में आखिरी नींद सो गए थे । महाभारत के बारे में जितना भी बताये वो भी कम है।

 

8 – गीता ज्ञान

बताते है की जब महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन ने अपने सगे सबन्धियो को देख कर अपने हथियार फैंक दिए थे तो उस समय भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को गीता ज्ञान दिया । और महाभारत में बताया गया है की श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को गीता ज्ञान कुरूक्षेत्र में ही दिया था  जिसके बाद अर्जुन को आत्म ज्ञान हुआ और उन्होंने पूरी ताकत से युद्ध किया था । इस लिए आज कुरूक्षेत्र एक ऐतिहासिक नगरी है ।

 

इन सब जगह के अलावा कुरूक्षेत्र में और और भी बहुत कुछ है देखने जिन्हें हम पर्यटन स्थल कहते है

1-मिनी चिड़ियाघर और ब्लैक बक प्रजनन केंद्र, पिपली
2-कुरुक्षेत्र पैनोरमा और साइंस सेंटर
3-कृष्ण संग्रहालय
4-जिंदल पार्क
5-पैनोरमा संग्रहालय
6-कैसल मॉल बच्चे मनोरंजन पार्क
7-धरोहर

One thought on “आखिर क्यों कहते है कुरूक्षेत्र को ऐतिहासिक नगरी !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *