जब मै छोटा बचा था, बड़ी सरारत करता था
 रोज स्कूल में जाता था पर काम कभी नही करता था !


मास्टर जी मन्ने पिटेंगे , मै इसे बात से डरता था..
 के करूँ मजबूरी थी मन्ने फेर भी जाना पड़ता था !

एक दिन मै स्कूल तै लुकग्या मेरे बापू नै बेरा पटग्या ..
 जब बापू का देखया जूता एक मिंट मै चेरा झड़गया !

फेर बापू नै बाँधी टाँग उल्टा दिया पेड़ पै टाँग..
 बचावन आला कोई नही सारे खड़े देखै थे सांग !

फेर मनै अपनी ग़लती मानी पढ़न लिखन की मन में ठानी..
 थाकै बस्ता स्कूल चल्या मै भूल गया था कापी ठानी !

फेर मनै मेहनत पूरी करी स्कॉलर्शिप से अपनी जेब भरी.
 मेरी मेहनत रंग ले आई ओर मै हो गया चिंता टाई फरी !

जब था छ्टी क्लास में जाना तब सीख्या था मन्नै गाना..
 पूजा पाठ मै करण लाग्ग्या शुरू कर दिया मंदिर जाना !

जब आठवीं में लिया दाखिला टॉप करण का सोच्या था जिला..
 म्हारे टाइम पै बोर्ड टूट्या मुरझा गया था जो फूल खिल्या !

आगे के कहानी जल्द ही लेकर आ रहा हूँ आपके लिए.

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